Thursday, November 26, 2015

पाक तेरी नापक हिमाकत

उस माँ के दामन को कोई नापाक छु नहीं सकता
जिस माँ की सेवा में वीरो की टोली हे
मेरे घर को दीवाली देकर।वो खेले खून की होली हे
मत खेल शेरो से तू गीदड़ की जात का
सब्र का इम्तेहान मत ले अब वक़्त नहीं बात का
अगर ये जट बिगड़ गए तो नामोनिशान नहीं छोड़ेंगे
एक बार कदम उठ गए तो फिर नहीं मोड़ेंगे
सुधर जा नहीं तो बर्बाद हो जाएगा नापाक
जलेगा ऐसा की ढूंढे भी नहीं मिलेगा राख

जय हिन्द जय भारत
ट्रिब्यूट तो भारतीय सेना

कलम से
रोहित नागर

सहिष्णुता

सुन ले आमिर कुछ बोलने से पहले
सोचले जरा अपना मुह खोलने से पहले

देश ये खराब नहीं देश तो महान हे
जिसके लिए हुए लाखों शहीद कुर्बान हे

तूने आज जिस माँ को लजाया हे
उसने तुझे अपने शीश पे बिठाया हे

जिसने बनाया तुझे अमीर ओ आमिर सुन
वो आवाम आज कैसे तुझे रास नहीं आई हे।
आज उस फ़िज़ा को तूने असहिष्णु कहा हे
उस फ़िज़ा में क्या तूने कभी थप्पड़ भी खाई हे

जब रोज वहा सरहद पे शहीद कोई होता था
तब तेरी आँखों में क्यों लाज नहीं आई हे।
नहीं शोक तुझे हमे और पालने का
जा जहा तुझे कोई और अच्छा मुल्क मिल जाये
हमने तो तुझे दिल से हटाने की कसम खाई हे।।

सहिष्णु रोहित
Twitter @rohitzt
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Sunday, November 15, 2015

जिंदगी का गुरुर

जिंदगी तुझे गुरुर हे में जानता हु।
मेरा जिना एक मज़बूरी हे मानता हु।
तेरी रहमत अगर होती तो ये रास्ते रास आते
तेरी रहमत अगर होती तो वो भी पास आते
क्यों हर बार तेरी चोखट पे मायूसी ही हाथ आई
क्यों कोई शक्ल नही ऐसी जो कभी साथ आई
मौत भी कही अच्छी हे तेरे गुरुर से
कोई लालच नहीं इसे तेरे सुरूर से
तू लालच दिखा के मजबूर करती हे
वो दुनिया के हर लालच से दूर करती हे
तुझे जीने का अगर अंदाज बदल जायेगा
तेरा गुरुर पल भर में निकल जायेगा।
अब तुझसे मायूस लोगो को में तुझसे जीतना सिखाऊंगा
तुझसे जो हारे में उसे जिताऊंगा।।।

Sunday, October 04, 2015

rom Raj-E-Dastaan:-Written by:-Rohit @[654444386:Rohit Sharma]

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Unke muskurane ko hum kya samjhe,
Hame dekhkar sharmane ko hum kya samjhe,
Unke is tarah milne ko hum kya samjhe,
Ise ittefaq ya Mohabbat Samjhe,
Ise kuch pal ka sathi,ya hum safar samjhe,
ise ektarfa pyar, ya aag dono taraf samjhe,
ise khushi samjhe,ya gum samjhe,
ise unki najakat ya, Hamari dum samjhe,
hum ise kuch bhi samjhe, magar wo itna samjhe,
Ki unki is ada ne is nasamjh ko itna to samjhaya,,
Jise Dil dhoondh raha hai, wo Teri hai chaya...

Ye dil Kuch Or samjha Tha

Vo Jazbon Ki Tejaarat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Usy Hensny Ki Aadat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Mujy Us Ny Keha Aur Nae Dunya Besaaty Hain

Usy Soojhi Sheraarat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Hemaisha Us Ki Aankhon Main Dhenak Sy Rang Rehty Thy

Ye Us Ki Aam Halat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Vo Mairy Paas Baithi Dair Tak Ghezlain Mairi Sunti

Usy Khud Sy Muhaabat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Mairy Kaandhy Py Ser Rekh Ker Keheen Kho Gie Thi Vo

Ye Ik Vaqti Anaayat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Mujy Vo Daikh Ker Aksar Nigaahain Phair Laiti Thi

Ye Der Perda Heqaarat Thi Ye Dil Kuch Aur Samjha Tha

Saturday, October 03, 2015

ऐसे ही कभी कभी

जिंदगी ये अपनी सनम ये किस मोड़ पर आके थम गई।
रोती नहीं हे अब आँख ये क्यों पानी में भी ये जम गई।

तू था कभी अपना सनम
अपने भी थे कितने भरम
तू अपना भी था तो एक सपना भी था
दिल का कोई गीत अपना भी था

Thursday, September 17, 2015

मेरी कलम

मुझे चिंगारियों से न डराओ लोगो
में अपना घर खुद जलाकर आया हु

मेरी कलम

आज आओ हम हुनर आजमाते हे
तुम अपना गुमान आजमाओ
में अपना सब्र आजमाता हु
तुम अपना गुरुर आजमाओ
में अपना इन्तहा आजमाता हु

Saturday, August 15, 2015

युवा शक्ति

युवा शक्ति

युवा शक्ति अब जाग भी जाओ।
सपनो को साकार बनाओ।

          क्योंकि उठो राह आसान नहीं हे
          ये खाली कोई मैदान नहीं हे
तुम्हे अपनी राह बनानी होगी
कई बार मुह की खानी होगी
           कंटक हे राहे तुम्हे चलना होगा
           लक्ष्य से नहीं भटकना होगा
गिर जाओ तो खुद ही संभलना होगा
कोई रोके कोई टोके, तुम्हे नहीं रुकना होगा।

देखो देश की आँखों में आज कितने आंसू बहे हे
दुश्मनो के हाथो से सीने कितनी बार छले हे।

दुश्मनो की नापाक हिमाकत बन्द नहीं हो सकती हे
अपने क्रोध की अग्नि से दुश्मन मूल समूल जलाओ।

युवा शक्ति अब जाग भी जाओ।

लो बागडोर अब हाथो में अपने
देखो दिन में ही तुम सपने
और सपनो के लिए समर्पित
करदो कुर्बान शोक भी अपने

नेता बनो। अधिकारी बनो।
डॉक्टर बनो या इंजीनयर।
ध्यान रहे बस देश हो पहले
और देश के लोग हो अपने

अपना धर्म निभाओगे तब
देश का कर्ज चुकाओगे तुम
हिंदुस्तान का नया इतिहास अपने हाथ बनाओगे तुम।
युवा शक्ति अब जाग भी जाओ।

माँ भारती के चरणों में समर्पित।
कलम से

रोहित शर्मा

Wednesday, August 12, 2015

जीवन क्या हे

जीवन

वेसे तो एक सीधा सा प्रश्न हे जीवन क्या हे?
मगर इसका जवाब उतना ही मुश्किल हे!
इसका जवाब परिस्थितियों के मुताबिक हम ढूंढे तो समझ आएगा की ये इतना आसान नहीं हे।
खुश हो तो इसका अलग अर्थ।
दुख हो तो अलग
मिलना हो किसीसे तो अलग
वियोग हो किसीका तो अलग
कुछ पाना हो तो अलग
कुछ खोना हो तो अलग
और सबसे बड़ी बात ये की जीवन का निष्कर्ष क्या हे।
क्या उम्र गुजरना या वक़्त का बीत जाना ही जीवन हे
क्या बड़ा आदमी बन जाना ही जीवन हे।
क्या धन का साम्राज्य खड़ा कर जाना ही जीवन हे
शायद नहीं!
तो फिर क्या हे जीवन!
जीवन हे रोते को हँसाना जीवन हे
भूखे को खिलाना जीवन हे
भटके को पहुचाना जीवन हे
बिगड़े को बनाना जीवन हे
अपने और गेरो को अपनाना जीवन हे
पैसा नहीं प्यार कमाना जीवन हे
और ये सब करते हुए अपने आप को इंसान बनाना जीवन हे।

इति श्री

रोहित शर्मा
9893444866

Saturday, August 08, 2015

Education system

Primary Education

Elementary education in India is a major challenge for government, and many children are still deprived of what is treated as a fundamental human right under Indian law. It comprises 8 years of school starting at age 6, and efforts are ongoing to engage communities where child labor is still common practice. The goal is to provide useful, relevant information in preparation for secondary education. Young females, particularly, are still being systematically deprived of this opportunity.

Secondary Education

In the course of the final 4 years of Indian school education a bridge is built between between the foundations laid by primary education, and the vocational or tertiary education that may follow. Although overall standards are controlled by examining boards, the curriculum is still largely based on the system that the British colonialists left behind. Pupils and their parents may choose between state or commercial schools, or those with associations with religious dogmas.

Vocational Education

Young people who do not wish to go on to tertiary education, or who fail to complete secondary school often enroll at privately-owned vocational schools that specialize in just one or only a few courses.  In do doing they prepare themselves to face the the impact of the liberalization and globalization of the Indian economy -  sadly, though many young women are still denied this opportunity.

Tertiary Education

India EducationIndia is justifiably proud on its universities which are mainly funded by state governments,  and many are centers of excellence. The 12 larger ones are funded by the central government though, which is more generous in its financial support. 

Although engineering and business colleges are accredited to a central body known as the AICTE, the Medical Council of India moderates all medical colleges. Progress is being made with managing teacher training in a similarly functional way.

माँ माँ ओ माँ ये केसी दिवाली हे

By:-Rohit Sharma(9893444866):- माँ माँ ओ माँ ये केसी दिवाली हे सबके घर उजाला हे, अपनी राते काली हे माँ माँ कितने दिन से पापा का दे...